गया जी में पिंड दान कैसे सम्पन्न होता है - पूरी जानकारी
गया जी में पिंड दान व श्राद्ध कर्म एक सुव्यवस्थित शास्त्रोक्त प्रक्रिया है, जिसे गोस्वामी परिवार पीढ़ियों के अनुभव के साथ यजमानों को समझाते हुए सम्पन्न करवाता है। नीचे संक्षेप में पूरी प्रक्रिया दी गई है, ताकि आप अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकें।
यात्रा से पूर्व हमें फोन या व्हाट्सएप पर संपर्क करें। हम आपकी सुविधानुसार तिथि, आवश्यक विधि (पिंड दान, त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बली आदि) व ठहरने की व्यवस्था के बारे में जानकारी देंगे।
गया पहुंचने पर सीधे गोस्वामी भवन, पंचमहल्ला आएं। स्टेशन व रास्ते में मौजूद दलालों से सावधान रहें - हम स्वयं आपसे सीधा संपर्क में रहेंगे।
पुरोहित द्वारा यजमान से संकल्प करवाया जाता है, जिसमें यजमान का नाम, गोत्र व उद्देश्य का उच्चारण होता है। यह पूरी विधि की नींव माना जाता है।
पिंड दान व तर्पण हेतु आवश्यक सामग्री (जौ का आटा, तिल, कुशा, पुष्प, गंगाजल आदि) की व्यवस्था गोस्वामी भवन द्वारा ही की जाती है।
विष्णुपद मंदिर व फल्गु नदी के तट पर शास्त्रोक्त मंत्रोच्चार सहित पिंड दान व तर्पण सम्पन्न किया जाता है। आवश्यकतानुसार अक्षयवट पर भी पिंड दान करवाया जाता है।
यदि पितृदोष निवारण अथवा अकाल मृत्यु सम्बन्धी विधि आवश्यक हो, तो त्रिपिंडी श्राद्ध व नारायण बली पूजा अतिरिक्त विधि-विधान से सम्पन्न करवाई जाती है।
विधि के अंत में ब्राह्मण भोज करवाया जाता है, जिसे कर्मकांड का अनिवार्य व अंतिम चरण माना जाता है। इसके पश्चात यजमान परिवार को आशीर्वाद के साथ पूर्णाहुति दी जाती है।
आने से पहले फोन द्वारा अवश्य संपर्क करें। रास्ते व स्टेशन पर दलालों से सावधान रहें।