श्री विष्णु गजाधर गया जी के पण्डा के रूप में गोस्वामी परिवार पीढ़ियों से यजमानों की सेवा में समर्पित है। स्व. बाबु चुन्नी लाल गोस्वामी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज आलोक कुमार गोस्वामी एवं अक्षय आनन्द गोस्वामी शास्त्रोक्त विधि-विधान से पिंड दान, तर्पण, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं नारायण बली पूजा सम्पन्न करवाते हैं।
गया जी को धरती पर मोक्ष-भूमि कहा जाता है — मान्यता है कि यहाँ पिंड दान करने मात्र से पितरों को अन्य कहीं किए गए श्राद्ध कर्म से भी अधिक शीघ्र मुक्ति मिलती है। हर वर्ष देश-विदेश से हजारों यजमान परिवार अपने पूर्वजों की सद्गति हेतु फल्गु तट व विष्णुपद पहुंचते हैं, और गोस्वामी परिवार हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करता है।
वेद-पुराणों में वर्णित विधि अनुसार सम्पूर्ण कर्मकांड।
राजेन्द्र लाल, चुन्नी लाल, पुरुषोत्तम लाल से आलोक व अक्षय तक।
मेवाड़, उदयपुर, रीवाँ, सतना, बांदा सहित अनेक जिलों के यजमान।
पितरों की आत्मा की शांति व मोक्ष प्राप्ति हेतु विष्णुपद तट पर विधिवत पिंड दान व तर्पण।
प्रेत योनि से पितृ योनि में लाने के लिए होता है त्रिपिंडी श्राद्ध।
अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं की शांति हेतु नारायण बली पूजा विधि।
पितृदोष के कारण आ रही बाधाओं के निवारण हेतु विशेष पूजा विधि।
भगवान शिव की कृपा व पितरों की तृप्ति हेतु रुद्र अभिषेक पूजा।
पूर्ण विधि-विधान से सम्पन्न होने वाला पारंपरिक श्राद्ध कर्म।
यात्रा से पूर्व फोन पर तिथि व संकल्प की जानकारी दें।
गोस्वामी भवन पहुंचने पर संकल्प व पूजन सामग्री की व्यवस्था।
विष्णुपद व फल्गु तट पर शास्त्रोक्त विधि से पिंड दान/तर्पण।
ब्राह्मण भोज व आशीर्वाद सहित कर्मकांड की पूर्णाहुति।
"गोस्वामी परिवार ने हमारे पूर्वजों का पिंड दान बड़ी श्रद्धा व शास्त्रोक्त विधि से करवाया। आलोक जी ने हर कदम पर मार्गदर्शन किया। पूरा परिवार संतुष्ट होकर लौटा।"
"रीवाँ से हमारा पूरा परिवार त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए आया था। फोन पर पहले ही पूरी जानकारी मिल गई थी, दलालों की कोई परेशानी नहीं हुई।"
"नारायण बली पूजा बहुत ही विधि-विधान से सम्पन्न हुई। अक्षय जी ने हर मंत्र व संकल्प समझाकर करवाया। धन्यवाद गोस्वामी परिवार।"
आने से पहले फोन द्वारा अवश्य संपर्क करें। रास्ते व स्टेशन पर दलालों से सावधान रहें।